पाचन1 मिनट
त्योहारी भोजनों के बीच चार घंटे का अंतर
दावत के दिनों में बड़े भोजनों के बीच लगभग चार घंटे छोड़ें और चाय-नाश्ता छोटा रखें। समय की आदत है जो पेट को आराम देती है, नियम नहीं।

पेट को आराम दें
त्योहारों में पूरा दिन एक लंबा भोजन बन सकता है, हर घंटे मिठाई और तला नाश्ता। असली भोजनों के बीच लगभग चार घंटे छोड़ने से पाचन को संभलने का समय मिलता है।
चाय-नाश्ता छोटा रखें, भोजनों के बीच एक घूँट पानी और थोड़ी सैर लें, और खाना खत्म होने पर थालियाँ हटा दें। यह समय की आदत है, चिकित्सा नियम नहीं।
सामग्री
- दीवार घड़ी या फ़ोन का अलार्म
- सादा पानी
- थोड़ी सैर
बनाने की विधि
- बड़ा भोजन खत्म करने का समय याद रखें।
- चार घंटे बाद का अलार्म लगा लें।
इस्तेमाल का तरीका
- बीच में भूख लगे तो फल या छोटा नाश्ता लें।
- अगली बड़ी थाली भूख लगने पर ही लें।
मददगार आदतें
- सबसे बड़ा भोजन दोपहर में लें।
- मेहमानों को छोटी प्लेटें परोसें।
सावधानियाँ
- मधुमेह या दवा वाले भोजन न छोड़ें; डॉक्टर की योजना मानें।
- बच्चों और बुज़ुर्गों को छोटे, ज़्यादा बार के भोजन चाहिए हो सकते हैं।
- आदत है, चिकित्सा नियम नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या ठीक चार घंटे का पालन ज़रूरी है?
- नहीं, लगभग ठीक है। बात यह है कि दिन भर कुछ-कुछ न खाते रहें।
बीच में भूख लगे तो?
- फल, मेवे या छाछ लें।
क्या यह सबके लिए ठीक है?
- जिन्हें दवा के लिए नियमित भोजन चाहिए, वे डॉक्टर की सलाह मानें।




