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मसूड़ों के कुल्ले के लिए जामुन पत्ती का काढ़ा

कुछ कोमल जामुन पत्ते उबालकर बना कसैला कुल्ला, नरम और फूले मसूड़ों के लिए ग्रामीण भारत का पारंपरिक उपाय।

कटोरी, गिलास और पारंपरिक बर्तनों का आयुर्वेदिक रसोई चित्र।

जामुन का इस्तेमाल ऐसे क्यों

जामुन बरसात का बैंगनी फल है जिसके बीज, पत्ते और छाल कसैले होते हैं। आयुर्वेद छाल और पत्तों को मुँह और मसूड़ों की देखभाल में और बीज को शुगर वाले आहार में इस्तेमाल करता है।

जामुन के पत्ते और छाल बहुत कसैले होते हैं, और भारत के गाँवों में लंबे समय से मसूड़ों और गले के गरारे के लिए इस्तेमाल होते रहे हैं। कसैले कुल्ले से मसूड़े कसे हुए लग सकते हैं, पर ये अपने आप मसूड़ों की बीमारी का इलाज नहीं करते।

सामग्री

  • 6 से 8 कोमल जामुन पत्ते
  • 2 कप पानी

बनाने की विधि

  1. पत्ते तब तक उबालें जब तक पानी लगभग एक कप रह जाए; गुनगुना होने तक ठंडा करके छान लें।

इस्तेमाल का तरीका

  • कुछ दिन दिन में दो बार कुल्ला और गरारा करें।
  • नरम ब्रश से धीरे ब्रश करें और रोज़ फ़्लॉस करें।

मददगार आदतें

  • बिना कीटनाशक वाले पेड़ से नए, साफ़ पत्ते तोड़ें।

सावधानियाँ

  • हफ़्ते से ज़्यादा मसूड़ों से ख़ून, ढीले दाँत या मवाद में दाँतों के डॉक्टर को दिखाएँ।
  • बीज या पत्तों की ज़्यादा मात्रा शुगर कम कर सकती है; शुगर की दवा के साथ सावधानी रखें।
  • दिन में दो बार ब्रश करते रहें; दर्द, सूजन या दो हफ़्ते से ज़्यादा रहने वाले छाले पर डेंटिस्ट को दिखाएँ।
  • यह घरेलू उपाय है, इलाज नहीं। लक्षण कुछ दिनों से ज़्यादा रहें या बढ़ें तो डॉक्टर को दिखाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या जामुन की छाल ले सकते हैं?

छाल ज़्यादा कसैली होती है; पानी में उबाला छोटा टुकड़ा पारंपरिक है।

क्या निगलना सुरक्षित है?

थूक दें; यह कुल्ले के लिए है।

क्या जामुन से दाँतों पर रंग चढ़ता है?

फल से थोड़ी देर रंग चढ़ता है; पानी से कुल्ला करने से साफ़ हो जाता है।