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गर्म रातों के लिए तकिए के नीचे खस की पोटली

सूखी खस की जड़ों की छोटी सूती पोटली तकिए के गिलाफ़ में, गर्मियों की रातों में ठंडी, सोंधी खुशबू के लिए।

चित्र में रूई, नरम तकिया की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

आयुर्वेद में खस

खस (वेटिवर) एक घास है जिसकी खुशबूदार जड़ें गर्मी के परदों में बुनने पर हवा ठंडी करती हैं। इन जड़ों को पीने के पानी या शरबत में भिगोना गर्मी का पारंपरिक ठंडा उपाय है।

उत्तर भारत में सदियों से घरों को महकाने और ठंडा रखने के लिए खस का इस्तेमाल होता रहा है। तकिए के पास छोटी पोटली हल्की, मन को टिकाने वाली खुशबू देती है जो कई लोगों को शांत करती है।

सामग्री

  • मुट्ठी भर सूखी खस की जड़ें
  • छोटी सूती पोटली या रूमाल

बनाने की विधि

  1. पोटली में जड़ें भरकर बाँध दें।
  2. खुशबू निकालने के लिए हल्के से पानी छिड़कें।

इस्तेमाल का तरीका

  • रात को तकिए के गिलाफ़ में या तकिए के पास रखें।
  • हर कुछ दिनों में पोटली धूप में सुखाएँ; हर महीने जड़ें बदलें।

मददगार आदतें

  • जड़ें अच्छी तरह धोएँ; दो इस्तेमाल के बीच धूप में सुखाएँ।

सावधानियाँ

  • छोटे बच्चों से दूर रखें जो इसे मुँह में डाल सकते हैं।
  • बाज़ार का खस सिरप ज़्यादातर चीनी और रंग होता है; जहाँ हो सके जड़ें इस्तेमाल करें।
  • खुजली, दाने, पेट खराब या कोई और परेशानी हो तो तुरंत बंद करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पानी क्यों छिड़कें?

नम खस अपनी ठंडी, सोंधी खुशबू ज़्यादा छोड़ती है।

क्या इससे कीड़े आएँगे?

नियमित धूप में सुखाने पर नहीं।

क्या खस और खसखस एक हैं?

नहीं, खसखस पोस्ता दाना है; खस वेटिवर की जड़ है।