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खस (वेटिवर): फ़ायदे और गर्मी में इस्तेमाल

खस की जड़ें भारतीय गर्मियों में पानी, हवा और त्वचा को ठंडा करती हैं। पीने के पानी, नहाने और कूलर में खस का इस्तेमाल और किन बातों से बचें।

कटोरी, गिलास और पारंपरिक बर्तनों का आयुर्वेदिक रसोई चित्र।

भारतीय घरों में खस

खस (वेटिवर) एक घास है जिसकी खुशबूदार जड़ें गर्मी के परदों में बुनने पर हवा ठंडी करती हैं। इन जड़ों को पीने के पानी या शरबत में भिगोना गर्मी का पारंपरिक ठंडा उपाय है।

आयुर्वेद में उशीर (खस) को पित्त, यानी गर्मी वाले दोष के लिए ठंडक और शांति देने वाला बताया गया है। उत्तर भारत के घरों में दरवाज़ों पर गीले खस के परदे टाँगे जाते थे, और मटके के पानी में जड़ों का छोटा गुच्छा डाला जाता था।

आज सबसे आसान तरीके हैं मिट्टी के मटके में साफ़ जड़ों का गुच्छा डालना, या बहुत गर्म दिनों में नहाने के पानी में मुट्ठी भर जड़ें।

सामग्री

  • खस की साफ़ जड़ों का छोटा गुच्छा (लगभग 10 ग्राम)
  • पीने के पानी का मिट्टी का मटका या स्टील का बर्तन

बनाने की विधि

  1. जड़ें बहते पानी में अच्छी तरह धोएँ।
  2. ढीला बाँधकर बर्तन में डाल दें।

इस्तेमाल का तरीका

  • हल्की खुशबू वाला पानी दिन भर पिएँ।
  • पानी रोज़ बदलें और बीच में जड़ें धूप में सुखाएँ; दो-तीन हफ़्ते में जड़ें बदल दें।

मददगार आदतें

  • जड़ें अच्छी तरह धोएँ; दो इस्तेमाल के बीच धूप में सुखाएँ।

सावधानियाँ

  • खट्टी या सीलन वाली गंध आए तो जड़ें फेंक दें।
  • बाज़ार का खस सिरप ज़्यादातर चीनी और रंग होता है; जहाँ हो सके जड़ें इस्तेमाल करें।
  • यह पारंपरिक इस्तेमाल है; वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। डॉक्टर की दी हुई दवा बंद न करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या खस के पानी का स्वाद होता है?

हल्की, मिट्टी जैसी ठंडी खुशबू; कड़वा नहीं लगना चाहिए।

क्या कूलर में खस लगा सकते हैं?

हाँ, कूलर में खस की चटाई से पुरानी ठंडी, सोंधी खुशबू आती है।

क्या खस और खसखस एक हैं?

नहीं, खसखस पोस्ता दाना है; खस वेटिवर की जड़ है।