मुख्य सामग्री पर जाएँ
AllAyurvedics

पिप्पली क्षीरपाक: दूध में उबली लंबी मिर्च

एक-दो पिप्पली दूध और पानी में उबालकर बनी शास्त्रीय तैयारी, सर्दियों की ठंडी शामों में कुछ दिन, डॉक्टर की सलाह से।

चित्र में बर्फ़ की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

ज़रूरी: यह नुस्खा केवल एक सहायक घरेलू उपाय है। डॉक्टर की लिखी दवाइयाँ लेते रहें, अपनी रीडिंग जाँचते रहें और कुछ भी नया शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें।

भारतीय घरों में पिप्पली

पिप्पली (लंबी मिर्च) पतली, बाली जैसी मिर्च है जो काली मिर्च से ज़्यादा तीखी होती है। सोंठ और काली मिर्च के साथ यह त्रिकटु बनाती है, आयुर्वेद का पुराना गर्म त्रिक।

क्षीरपाक का अर्थ है जड़ी को दूध में तब तक उबालना जब तक पानी उड़ जाए। आयुर्वेद में पिप्पली क्षीरपाक छाती की जकड़न और सर्दियों की कमज़ोरी के लिए बताया गया है। यह गर्म और तेज़ है, इसलिए थोड़े समय के लिए लें।

सामग्री

  • 1 से 2 पिप्पली
  • ½ कप दूध
  • ½ कप पानी

बनाने की विधि

  1. पिप्पली कूटकर दूध और पानी में तब तक उबालें जब तक लगभग आधा कप रह जाए।
  2. छान लें।

इस्तेमाल का तरीका

  • सर्दियों में तीन से पाँच दिन शाम को गुनगुना पिएँ।

मददगार आदतें

  • साबुत पिप्पली लें और थोड़ी-थोड़ी पीसें।

सावधानियाँ

  • एसिडिटी, अल्सर या गर्भावस्था में न लें।
  • बहुत गर्म है; एसिडिटी, अल्सर, गर्भावस्था और बच्चों में न लें।
  • खुजली, दाने, पेट खराब या कोई और परेशानी हो तो तुरंत बंद करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पानी उड़ने तक क्यों उबालते हैं?

इससे जड़ी दूध में गाढ़ी हो जाती है, यही शास्त्रीय क्षीरपाक विधि है।

क्या हल्दी मिला सकते हैं?

हाँ, चुटकी भर आम है।

चुटकी भर पिप्पली कितनी होती है?

पाउडर का चौथाई छोटे चम्मच से भी कम।