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गले की खिच-खिच वाली खाँसी के लिए सौंफ-मिश्री की चाय

सौंफ मिश्री के टुकड़े के साथ उबालकर बनी हल्की, मीठी चाय, शाम की सूखी, खिच-खिच वाली खाँसी के लिए।

चित्र में सौंफ, मिश्री की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

आयुर्वेद में सौंफ

सौंफ मीठी, खुशबूदार और ठंडक देने वाली होती है। पूरे भारत में खाने के बाद इसे चबाया जाता है और गैस व भारीपन में इसकी हल्की चाय बनाई जाती है।

सौंफ सौम्य और आरामदायक है, और मिश्री खाँसी के नुस्खों की पारंपरिक मिठास है। गुनगुनी मीठी चाय गले की खिच-खिच में आराम देती है और परिवार में ज़्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित है।

सामग्री

  • 1 छोटा चम्मच सौंफ
  • मिश्री का 1 छोटा टुकड़ा
  • 1½ कप पानी

बनाने की विधि

  1. सौंफ हल्की कूटकर मिश्री के साथ पाँच मिनट उबालें।
  2. छान लें।

इस्तेमाल का तरीका

  • कुछ दिन शाम को गुनगुनी पिएँ।

मददगार आदतें

  • हरे, भरे हुए दाने चुनें; फीके भूरे दाने पुराने होते हैं।

सावधानियाँ

  • डायबिटीज़ हो तो मिश्री न डालें।
  • गर्भावस्था में बहुत ज़्यादा मात्रा की सलाह नहीं दी जाती।
  • खुजली, दाने, पेट खराब या कोई और परेशानी हो तो तुरंत बंद करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या बच्चे इसे पी सकते हैं?

हाँ, दो साल से बड़े बच्चों के लिए हल्का, गुनगुना आधा कप ठीक है।

क्या मुलेठी डाल सकते हैं?

बड़े ज़्यादा आराम के लिए छोटा टुकड़ा डाल सकते हैं।

चीनी वाली सौंफ या सादी?

सादी या हल्की भुनी सौंफ बेहतर है; चीनी चढ़ी सौंफ में चीनी और रंग होता है।