जोड़20 मिनट
जकड़ी कमर के लिए गुनगुना तिल का तेल और गर्म तौलिया
कमर पर गुनगुने तिल के तेल की मालिश और फिर गर्म तौलिये की सिकाई, आयुर्वेद की तेल-और-गर्मी चिकित्सा का आसान घरेलू रूप।

आयुर्वेद में तिल
आयुर्वेद में तिल के बीज और तेल गर्म और पोषण देने वाले माने जाते हैं। तिल का तेल अभ्यंग (तेल मालिश) का पारंपरिक आधार है, और बीजों से कैल्शियम, आयरन और अच्छी चिकनाई मिलती है।
आयुर्वेद वात वाली जकड़न में स्नेहन (तेल लगाना) के साथ स्वेदन (गर्मी) जोड़ता है। घर पर गुनगुना तिल का तेल और गर्म तौलिया तनी मांसपेशियों को ढीला कर सकते हैं। बाद में हल्का हिलना-डुलना मालिश जितना ही ज़रूरी है।
सामग्री
- 2 छोटे चम्मच तिल का तेल
- गर्म पानी में भिगोकर निचोड़ा तौलिया
बनाने की विधि
- तेल गुनगुना करके कमर पर पाँच से दस मिनट मालिश करें।
- गर्म (जलाने वाला नहीं) तौलिया 10 मिनट उस जगह रखें।
इस्तेमाल का तरीका
- बाद में घुटना-छाती जैसे हल्के स्ट्रेच करें।
- कुछ दिन शाम को दोहराएँ।
मददगार आदतें
- मालिश के लिए भुने तिल का नहीं, कच्ची घानी का तिल का तेल लें।
सावधानियाँ
- ताज़ी चोट पर गर्मी न दें। सुन्नपन, पैर में कमज़ोरी, बुख़ार या पेशाब की परेशानी के साथ कमर दर्द में तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ।
- तिल से एलर्जी आम है; प्रतिक्रिया हो तो न लें।
- खुजली, दाने, पेट खराब या कोई और परेशानी हो तो तुरंत बंद करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या गर्म पानी की थैली ले सकते हैं?
- हाँ, जलने से बचने के लिए तौलिये में लपेटकर।
क्या बिस्तर पर आराम बेहतर है?
- हल्का सक्रिय रहने से कमर दर्द आमतौर पर जल्दी ठीक होता है।
सफ़ेद तिल या काले तिल?
- दोनों पौष्टिक हैं; बालों और सर्दियों के लिए परंपरा में काले तिल पसंद किए जाते हैं।


