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नारियल तेल से गंडूष, फिर त्रिफला का कुल्ला

सुबह पाँच से दस मिनट नारियल तेल से गंडूष (ऑयल पुलिंग) और फिर हल्के त्रिफला पानी से कुल्ला, ब्रश के साथ एक अतिरिक्त आदत।

चित्र में नारियल की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

आयुर्वेद में त्रिफला

त्रिफला तीन सूखे फलों, आँवला, हरड़ और बहेड़ा, का पुराना मिश्रण है। यह थोड़ी मात्रा में पाचन और पेट साफ़ रखने में हल्की मदद के लिए सबसे ज़्यादा जाना जाता है।

ऑयल पुलिंग आयुर्वेदिक तरीका है, और छोटे अध्ययन बताते हैं कि यह प्लाक और मुँह की बदबू थोड़ी कम कर सकता है। छोटे अध्ययनों में त्रिफला के कुल्ले का भी प्लाक पर हल्का असर दिखा है। इनमें से कोई भी ब्रश, फ़्लॉस और दाँतों के डॉक्टर की जगह नहीं लेता।

सामग्री

  • 1 बड़ा चम्मच नारियल तेल
  • ½ छोटा चम्मच त्रिफला चूर्ण
  • 1 कप गुनगुना पानी

बनाने की विधि

  1. त्रिफला को गुनगुने पानी में 15 मिनट भिगोकर छान लें।
  2. नारियल तेल जमा हो तो पिघला लें।

इस्तेमाल का तरीका

  • तेल को पाँच से दस मिनट धीरे-धीरे मुँह में घुमाएँ और सिंक में नहीं, कूड़ेदान में थूकें।
  • त्रिफला पानी से कुल्ला करें, फिर हमेशा की तरह ब्रश करें।

मददगार आदतें

  • भाप से दूर हवाबंद डिब्बे में रखें; नमी में गाँठें बन जाती हैं।

सावधानियाँ

  • तेल निगलें नहीं। छोटे बच्चों के लिए नहीं, उनके गले में अटक सकता है।
  • इससे दस्त हो सकते हैं; दस्त के दौरान और गर्भावस्था में न लें।
  • दिन में दो बार ब्रश करते रहें; दर्द, सूजन या दो हफ़्ते से ज़्यादा रहने वाले छाले पर डेंटिस्ट को दिखाएँ।
  • यह घरेलू उपाय है, इलाज नहीं। लक्षण कुछ दिनों से ज़्यादा रहें या बढ़ें तो डॉक्टर को दिखाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

तेल सिंक में क्यों न थूकें?

नारियल तेल जम जाता है और नाली बंद कर सकता है।

कितनी बार?

हफ़्ते में कुछ सुबह काफ़ी है।

क्या त्रिफला की आदत पड़ जाती है?

इसके प्रमाण कम हैं, फिर भी इसे हमेशा नहीं, थोड़े-थोड़े समय के लिए लेना बेहतर है।