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गैस वाली दाल और राजमा के लिए हींग-घी का तड़का

गर्म घी में जीरे के साथ खिली चुटकी भर हींग, राजमा, चने या उड़द की दाल पर डालें ताकि पेट पर भारी न पड़े।

चित्र में जीरा, ताज़ा अदरक, चना की आयुर्वेदिक रसोई की व्यवस्था।

हींग के बारे में ज़रूरी बातें

हींग एक सूखा गोंद है जिसकी तेज़ गंध गर्म घी में नरम हो जाती है। पूरे भारत में दाल और राजमा जैसी चीज़ों को आसानी से पचाने के लिए इसकी चुटकी डाली जाती है।

राजमा-छोले और भारी दालें गैस की आम वजह हैं। भारतीय रसोइए लंबे समय से इनमें हींग, जीरा और अदरक डालते आए हैं; अच्छी तरह भिगोना और नरम होने तक पकाना भी उतना ही ज़रूरी है।

सामग्री

  • 1 छोटा चम्मच घी
  • चुटकी भर हींग
  • ½ छोटा चम्मच जीरा
  • थोड़ा कसा अदरक

बनाने की विधि

  1. घी गर्म करें, जीरा डालकर चटकने दें।
  2. हींग और अदरक डालें, पाँच सेकंड चलाएँ और पकी दाल पर डाल दें।

इस्तेमाल का तरीका

  • राजमा, छोले, उड़द या मिली-जुली दाल में इस्तेमाल करें।
  • चावल या रोटी और थोड़े सलाद के साथ सामान्य मात्रा में खाएँ।

मददगार आदतें

  • मिली हुई हींग में अक्सर गेहूँ का आटा होता है; ग्लूटेन से बचते हों तो लेबल देखें।

सावधानियाँ

  • हींग जल्दी जलती है; आँच धीमी रखें।
  • सिर्फ़ चुटकी भर; ज़्यादा मात्रा से पेट खराब हो सकता है। शिशुओं को मुँह से न दें।
  • यह घरेलू उपाय है, इलाज नहीं। लक्षण कुछ दिनों से ज़्यादा रहें या बढ़ें तो डॉक्टर को दिखाएँ।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या राजमा भिगोने से मदद मिलती है?

हाँ, रात भर भिगोकर पानी फेंकने से गैस कम होती है।

क्या हींग सीधे दाल में डाल सकते हैं?

हाँ, पर चिकनाई में खिलाने से स्वाद बेहतर आता है।

हींग पहले घी में क्यों तलते हैं?

गर्मी से इसकी तीखी गंध नरम होती है और स्वाद फैलता है।