पाचन5 मिनट
रात भर भिगोया त्रिफला पानी
आधा चम्मच त्रिफला रात भर पानी में भिगोकर सुबह पिएँ, सोते समय की ख़ुराक से हल्का तरीका।

आयुर्वेद में त्रिफला
त्रिफला तीन सूखे फलों, आँवला, हरड़ और बहेड़ा, का पुराना मिश्रण है। यह थोड़ी मात्रा में पाचन और पेट साफ़ रखने में हल्की मदद के लिए सबसे ज़्यादा जाना जाता है।
कुछ परिवार त्रिफला रात भर भिगोकर सुबह ऊपर का साफ़ पानी पीना पसंद करते हैं, जिससे कुछ तलछट पीछे रह जाती है। शुरुआत करने वालों के लिए यह जीभ और पेट पर हल्का पड़ता है।
सामग्री
- ½ छोटा चम्मच त्रिफला चूर्ण
- 1 गिलास पानी
बनाने की विधि
- रात को त्रिफला पानी में घोलें, ढककर छोड़ दें।
- सुबह ऊपर का साफ़ पानी अलग कर लें।
इस्तेमाल का तरीका
- खाली पेट घूँट-घूँट पिएँ।
- दो हफ़्ते आज़माएँ, फिर विराम लें।
मददगार आदतें
- भाप से दूर हवाबंद डिब्बे में रखें; नमी में गाँठें बन जाती हैं।
सावधानियाँ
- दस्त के दौरान या पेट ढीला होने पर न लें।
- इससे दस्त हो सकते हैं; दस्त के दौरान और गर्भावस्था में न लें।
- अगर आप नियमित दवा लेते हैं या कोई पुरानी बीमारी है, तो पहले डॉक्टर से पूछें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या तलछट भी पी सकते हैं?
- हाँ, वह ज़्यादा तेज़ है; साफ़ पानी से शुरू करें।
गुनगुना पानी बेहतर है या ठंडा?
- कमरे के तापमान का पानी ठीक है; सर्दियों में गुनगुना पारंपरिक है।
क्या त्रिफला की आदत पड़ जाती है?
- इसके प्रमाण कम हैं, फिर भी इसे हमेशा नहीं, थोड़े-थोड़े समय के लिए लेना बेहतर है।




